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चकचंदा ग्रामीण संस्कृति में परस्पर जीने की कला का उल्लासमय त्यौहार है

जागरण न्यूज़ एक्सप्रेस

पीपराकोठी चक चंदा बिहार में मनाया जाने वाला एक त्यौहार है, जो भाद्रपद महीने की शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है. भारत के अन्य भागों में लोग गणेश जन्मोत्सव के रूप में भी इस दिन को मनाते हैं, तथा गणेशजी की पूजा-अर्चना करते हैं. बिहार के ज्यादातर हिस्सों में लोग चक चंदा मनाते हैं. बहुत पहले जब स्कूली शिक्षा व्यवस्था सरकारी दायरे के बाहर थी, तो गुरुजी के जीवकोपार्जन का एकमात्र माध्यम विद्यार्थियों से प्राप्त गुरुदक्षिणा होती थी. भादो के महीने में तब चक चंदा को एक समारोह की तरह मनाया जाता था. भाद्रपद चतुर्थी से आरंभ कर अगले 10 दिनों में गांव के सभी घरों में जाकर विद्यार्थी गणेश वंदना गाते और चंदा मांगते थे.

मांगी हुई चंदा गुरु जी को ससम्मान पहुंचा दिया जाता था. वास्तव में यह त्यौहार ग्रामीण संस्कृति में परस्पर जीने की एक कला का उल्लासमय आयोजन है. हिंदू धर्म जीसे सनातन धर्म कहते है जिस के अनुयाई अधिकांश भारत नेपाल और मारीशस में बहुमत में है. इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म भी कहा जाता है. इसे वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म भी कहते हैं, जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है. विद्वान लोग हिंदू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परंपराओं का सम्मिश्रण मानते हैं. जिसका कोई संस्थापक नहीं है. यह धर्म अपने अंदर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियां मत संप्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं. अनुयायियों की संख्या के आधार पर विश्व का सबसे बड़ा धर्म है. संख्या के आधार पर अधिकतर उपासक भारत में है, और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में है.

हालांकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा अर्चना होती है, लेकिन वास्तव में एक ईश्वर बादी धर्म है. इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म कहते हैं. इंडोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम हिंदू आगम है. हिंदू केवल एक धर्म या संप्रदाय ही नहीं है, अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है. जिसके अंतर्गत भारत की त्यौहार एवं व्रत की उपासना किया जाता है. आज इस चक चंदा के दिन महिलाएं निराहार रहकर गणेश जी की उपासना करती है, तथा शाम को पूजा अर्चना करने के बाद इस पर्व का समापन करती है.

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