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आर्थिक हल, युवाओं को बल व कौशल विकास योजना

जागरण न्यूज़ एक्सप्रेस, कैलाश गुप्ता

कैलाश गुप्ता
कैलाश गुप्ता

युवाओं के लिए संचालित योजनाएं केंद्र सरकार की हो या राज्य की इसका लाभ नाम मात्र के युवाओं को ही मिलता है, जबकि यह स्पष्ट है कि युवा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। युवा आज और कल का भी नेता है यानि देश का वर्तमान भी है और भविष्य भी हैं।

गौरतलब है कि भारत एक ऐसा देश है जहां 50 प्रतिशत जनसंख्या युवा है। यह जनसांख्यिकी लाभांश भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर है, विकास के लिए और अनुसंधान एवं नए शोध प्रबंधों के लिए भी। युवा आबादी के बावजूद भारत में स्थिति और देशों की अपेक्षा गम्भीर ही है, जहां बेरोजगारी, गरीबी, पानी, शौचालय एवं शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत बड़ी चुनौतियां हैं। बहुत से युवा जिनमें से बहुत उच्च शिक्षा प्राप्त हैं परन्तु उन्हें कोई उचित रोजगार नहीं प्राप्त हैं और नजदीक भविष्य में कोई संभावना भी नहीं दिखती जिससे वे हतोत्साहित और भविष्य के प्रति निराश तथा सरकार में अपना विश्वास खोते जा रहे हैं। हमारे भारत में अभी भी 65 प्रतिशत जनसंख्या गांव में रहती है, और 35 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में रहती हैं। वही ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत की 50 प्रतिशत जनसंख्या 2050 तक में शहरों में रहने लगेगी।

बताया जाता है कि आज भारत एक विकसित देश की श्रेणी में आने के लिए अग्रसर है फिर भी आकड़ों के अनुसार अभी लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है जिसमें युवा वर्ग की जनसंख्या सबसे अधिक हैं। जिन्हें या तो कोई रोजगार प्राप्त नहीं है अथवा अपने योग्यता के अनुसार उपयुक्त रोजगार पाने में सफल नहीं हो पाए हैं। वही ऐसा माना जाता है कि करीब 53 प्रतिशत युवा अपनी नौकरी से असंतुष्ट है। क्योंकि उनकी नौकरी उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नहीं है। बहुत से युवा तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद पुलिस एवं चपरासी की नौकरी करने के लिए बाध्य हैं। यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है और बहुत बड़ा नुकसान भी। आज हर युवा सम्मान एवं सहभागिता चाहता है।

दूसरे शब्दों में युवा वर्ग को सकारात्मक मानव शक्ति के रूप में देखना बहुत जरूरी है न कि एक समस्या के रूप में। उच्च शिक्षा से निपुण यह युवा वर्ग देश और समाज की बहुत बड़ी पूंजी है, जो देश को विकास की ओर अग्रसित करेगा। बेरोजगारी एवं असंतोष युवा वर्ग में बढ़ेगा और विकास की गति को भी प्रभावित करेगा। उच्च शिक्षा का भी बहुत बुरा हाल है, भारत में अभी भी विश्वविद्यालयों की संख्या लगभग 800 है। अच्छे शोध प्रबंध एवं शोध-पत्रों की गुणवत्ता तथा संख्या में भी कमी आई है।

वही बताया जाता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने कई उपक्रम शुरू किए हैं, लेकिन जब तक सबका सहयोग विशेष तौर से युवा वर्ग का सहयोग पूर्ण रूप से नहीं मिलता लक्ष्यों की प्राप्ति करना 2030 तक की समय सीमा में पूरा कर पाना असम्भव है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि शिक्षा को व्यापक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जाए। एक नवीनतम रिपोर्ट में 24 राज्यों के 28 शहरों के दुखद स्थिति का वर्णन किया है, जिसमें आठवीं कक्षा के एक चौथाई छात्र अपनी भाषा में पढ़ नहीं सकते और 57 प्रतिशत बच्चे सामान्य गुणा भाग के सवालों को हल नहीं कर पाते और तो और 14 प्रतिशत बच्चे भारत के नक्शे को पहचान नहीं पाते तथा 36 प्रतिशत देश की राजधानी का नाम नहीं जानते। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एक अच्छी योजना होने के बावजूद उसके परिणाम सकारात्मक नहीं आ पाए हैं और आज कौशल विकास की भारत में अत्यन्त कमी देखी जा रही है।

सर्वविदित है कि भारत के युवा वर्ग की रचनात्मक प्रतिभा, उनकी असीमित ऊर्जा और नवीन अन्वेषण की क्षमता देश को राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास करने से लेकर विश्व में भारत को उच्च शिखर पर ले जाने की क्षमता हैं। सर्वविदित यह भी है कि आज सूचना संचार खासतौर से इंटरनेट ने युवा वर्ग को और सशक्त बना दिया है, जो देशों और विभिन्न क्षेत्रों में विचार आदान-प्रदान और उनको विकसित करने तथा उनका उपयोग करने में एक दूसरे की मदद करने में सक्षम हो गए हैं। युवा आज इस विकसित तकनीक के माध्यम से हर एक क्षेत्र में ब्लाग लिखकर, सोशल नेटवर्किंग साईट विकसित करने, फोटो शेयर करके लाखों लोगों के साथ सम्पर्क बनाकर एक-दूसरे के नजदीक आ रहे हैं। यहाँ तक कि सामाजिक विकास के लक्ष्यों की उपलब्धियों में पिछड़ापन भी युवाओं के भविष्य को भी प्रभावित कर रहा है। 15 से 29 वर्ष के बच्चों के उच्च अनुपात एक दो-धारी तलवार है। जहां नया शोध यह दिखाता है कि युवाओं का (जो बेरोजगार हैं) उभार देश में विवाद और खतरा पैदा कर रहा है, परंतु यह उभार एक बहुत बड़ा अवसर भी है जो श्रम बल के रूप में निवेश, आर्थिक उन्नति और रोजगार को बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है।

ऐसा मानना है कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य को सबसे अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए तथा देश में एवं विभिन्न राज्यों में कौशल विकास योजना को और अधिक महत्व देना चाहिए। इस क्षेत्र में एक व्यापक सर्वेक्षण होना चाहिए जिसमें भारत का युवा क्या चाहता है और क्या उसकी प्राथमिकता है उसपर उनकी राय जाननी चाहिए। साथ ही साथ एक सर्वेक्षण और कराना चाहिए जिससे पता चल सके कि किस कौशल में कितने प्रशिक्षित लोगों की निकट भविष्य में आवश्यकता होगी।

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